The Great Liberation Tantra3.75
वाचिकं कायिकं वाऽपि मानसं वा यथामति ।
आराधने परेशस्य भावशुद्धिर्विधीयते ॥७५॥
vācikaṃ kāyikaṃ vā'pi mānasaṃ vā yathāmati |
ārādhane pareśasya bhāvaśuddhirvidhīyate ||75||
— वाचिक ; — कायिक ; — अथवा ; — मानसिक ; — अथवा ; — यथामति ; — आराधना में ; — परेश की ; — भाव-शुद्धि ; — विहित है परेश की आराधना में — चाहे वाचिक हो, कायिक हो, या मानसिक — यथामति, भाव-शुद्धि ही विहित है।