The Great Liberation Tantra· 3.76 / 153

The Great Liberation Tantra3.76

3.76
एवं संपूज्य मतिमान् स्वजनैर्बान्धवैः सह । महाप्रसादं स्वीकुर्याद् ब्रह्मणः परमात्मनः ॥७६॥
evaṃ saṃpūjya matimān svajanairbāndhavaiḥ saha | mahāprasādaṃ svīkuryād brahmaṇaḥ paramātmanaḥ ||76||
— इस प्रकार ; — भलीभाँति पूजा करके ; — बुद्धिमान् ; — अपने स्वजनों और बान्धवों के साथ ; — साथ ; — महाप्रसाद को ; — ग्रहण करे ; — ब्रह्म का ; — परमात्मा का

इस प्रकार पूर्णतः पूजा करके, बुद्धिमान् अपने स्वजनों और बान्धवों सहित, ब्रह्म — परमात्मा — के महाप्रसाद को ग्रहण करे।