The Great Liberation Tantra3.77
पूजने परमेशस्य नावाहनविसर्जने ।
सर्वत्र सर्वकालेषु साधयेद् ब्रह्मसाधनम् ॥७७॥
pūjane parameśasya nāvāhanavisarjane |
sarvatra sarvakāleṣu sādhayed brahmasādhanam ||77||
— पूजा में ; — परमेश की ; — आवाहन और विसर्जन नहीं ; — सर्वत्र ; — सब कालों में ; — साधन करे ; — ब्रह्म-साधन को परमेश की पूजा में न आवाहन है, न विसर्जन; सर्वत्र और सब कालों में ब्रह्म-साधन किया जा सकता है।