श्रीजगन्मङ्गलस्यास्य कवचस्य सदाशिवः ।
ऋषिश्छन्दोऽनुष्टुविति परमब्रह्म देवता ।
चतुर्वर्गफलावाप्त्यै विनियोगः प्रकीर्तितः ॥६९॥
śrījaganmaṅgalasyāsya kavacasya sadāśivaḥ |
ṛṣiśchando'nuṣṭuviti paramabrahma devatā |
caturvargaphalāvāptyai viniyogaḥ prakīrtitaḥ ||69||
इस श्री 'जगन्मंगल' कवच के ऋषि सदाशिव हैं, छन्द अनुष्टुप् है, देवता परम ब्रह्म है; चारों पुरुषार्थों के फल की प्राप्ति के लिए इसका विनियोग कहा गया है।