The Great Liberation Tantra· 3.69 / 153

The Great Liberation Tantra3.69

3.69
श्रीजगन्मङ्गलस्यास्य कवचस्य सदाशिवः । ऋषिश्छन्दोऽनुष्टुविति परमब्रह्म देवता । चतुर्वर्गफलावाप्त्यै विनियोगः प्रकीर्तितः ॥६९॥
śrījaganmaṅgalasyāsya kavacasya sadāśivaḥ | ṛṣiśchando'nuṣṭuviti paramabrahma devatā | caturvargaphalāvāptyai viniyogaḥ prakīrtitaḥ ||69||
— इस श्री 'जगन्मंगल' का ; — कवच के ; — सदाशिव ; — ऋषि ; — छन्द ; — अनुष्टुप् ; — (ऐसा) ; — परम ब्रह्म ; — देवता ; — चारों पुरुषार्थों के फल की प्राप्ति के लिए ; — विनियोग ; — कहा गया

इस श्री 'जगन्मंगल' कवच के ऋषि सदाशिव हैं, छन्द अनुष्टुप् है, देवता परम ब्रह्म है; चारों पुरुषार्थों के फल की प्राप्ति के लिए इसका विनियोग कहा गया है।