The Great Liberation Tantra3.70
यः पठेद् ब्रह्मकवचं ऋषिन्यासपुरःसरम् ।
स ब्रह्मज्ञानमासाद्य साक्षाद्ब्रह्ममयो भवेत् ॥७०॥
yaḥ paṭhed brahmakavacaṃ ṛṣinyāsapuraḥsaram |
sa brahmajñānamāsādya sākṣādbrahmamayo bhavet ||70||
— जो ; — पाठ करे ; — ब्रह्म-कवच को ; — ऋषि-न्यास पूर्वक ; — वह ; — ब्रह्म-ज्ञान को ; — प्राप्त करके ; — साक्षात् ब्रह्ममय ; — हो जो ऋषि-न्यास पूर्वक ब्रह्म-कवच का पाठ करता है, वह ब्रह्म-ज्ञान प्राप्त करके साक्षात् ब्रह्ममय हो जाता है।