The Great Liberation Tantra· 3.42 / 153

The Great Liberation Tantra3.42

3.42
कनिष्ठयोः करतलपृष्ठयोः सुरवन्दिते । नमः स्वाहा वषट् हू| वौषट् फडन्तैर्यथाक्रमम् ॥४२॥
kaniṣṭhayoḥ karatalapṛṣṭhayoḥ suravandite | namaḥ svāhā vaṣaṭ hū| vauṣaṭ phaḍantairyathākramam ||42||
— दोनों कनिष्ठाओं पर ; — हथेली के आगे और पीछे ; — हे सुरवन्दिते ; — 'नमः' ; — 'स्वाहा' ; — 'वषट्' ; — 'हूँ' ; — 'वौषट्' ; — 'फट्' अन्त वालों से ; — क्रमशः

और हे सुरवन्दिते, दोनों कनिष्ठाओं पर तथा हथेली के आगे और पीछे — क्रमशः नमः, स्वाहा, वषट्, हूँ, वौषट् और फट् से (न्यास करे)।