The Great Liberation Tantra· 3.139 / 153

The Great Liberation Tantra3.139

3.139
मन्त्रग्रहणमात्रेण तदात्मा तन्मयो भवेत् । ब्रह्मभूतस्य देवेशि किमन्यैर्बहुसाधनैः ॥१३९॥
mantragrahaṇamātreṇa tadātmā tanmayo bhavet | brahmabhūtasya deveśi kimanyairbahusādhanaiḥ ||139||
— मन्त्र के ग्रहण मात्र से ; — तत्-आत्मा ; — तन्मय ; — हो ; — ब्रह्मभूत हुए के ; — हे देवेशि ; — अन्य बहुत-से साधनों से क्या

मन्त्र के ग्रहण मात्र से वह तत्-आत्मा, तन्मय हो जाता है; हे देवेशि, ब्रह्मभूत हुए के लिए अन्य बहुत-से साधनों से क्या (प्रयोजन)?