इति संक्षेपतो ब्रह्मदीक्षा ते कथिता प्रिये ।
गुरुकारुण्यमात्रेण ब्रह्मदीक्षां समाश्रयेत् ॥१४०॥
iti saṃkṣepato brahmadīkṣā te kathitā priye |
gurukāruṇyamātreṇa brahmadīkṣāṃ samāśrayet ||140||
हे प्रिये, इस प्रकार संक्षेप से ब्रह्म-दीक्षा तुम्हें कही; गुरु की करुणा मात्र से (मनुष्य) ब्रह्म-दीक्षा का आश्रय ले।