The Great Liberation Tantra· 3.121 / 153

The Great Liberation Tantra3.121

3.121
कलौ पापयुगे घोरे तपोहीनेऽतिदुस्तरे । निस्तारबीजमेतावत् ब्रह्ममन्त्रस्य साधनम् ॥१२१॥
kalau pāpayuge ghore tapohīne'tidustare | nistārabījametāvat brahmamantrasya sādhanam ||121||
— कलियुग में ; — पापी युग में ; — घोर ; — तप से रहित ; — अत्यन्त दुस्तर ; — निस्तार का बीज ; — मात्र इतना ; — ब्रह्म-मन्त्र का ; — साधन

घोर, पापी, तप से रहित, और अत्यन्त दुस्तर कलियुग में ब्रह्म-मन्त्र का साधन ही मात्र निस्तार का बीज है।