The Great Liberation Tantra3.104
येनोपायेन मर्त्यानां लोकयात्रा प्रसिद्ध्यति ।
तदेव कार्यं ब्रह्मज्ञैरिदं धर्मं सनातनम् ॥१०४॥
yenopāyena martyānāṃ lokayātrā prasiddhyati |
tadeva kāryaṃ brahmajñairidaṃ dharmaṃ sanātanam ||104||
— जिस उपाय से ; — मर्त्यों की ; — लोक-यात्रा ; — सिद्ध होती है ; — वही ; — करने योग्य ; — ब्रह्मज्ञों के द्वारा ; — यह ; — धर्म ; — सनातन जिस उपाय से मर्त्यों की लोक-यात्रा सिद्ध होती है, ब्रह्मज्ञों को वही करना चाहिए — यही सनातन धर्म है।