तत्सदिति वदेद्देवि प्रारम्भे सर्वकर्मणाम् ।
ब्रह्मार्पणमस्तु वाक्यं पानभोजनकर्मणोः ॥१०३॥
tatsaditi vadeddevi prārambhe sarvakarmaṇām |
brahmārpaṇamastu vākyaṃ pānabhojanakarmaṇoḥ ||103||
हे देवि, समस्त कर्मों के प्रारम्भ में 'तत् सत्' कहे; और पान तथा भोजन के कर्मों में 'ब्रह्मार्पणमस्तु' (यह ब्रह्म को अर्पित हो) वाक्य (कहे)।