The Great Liberation Tantra· 3.103 / 153

The Great Liberation Tantra3.103

3.103
तत्सदिति वदेद्देवि प्रारम्भे सर्वकर्मणाम् । ब्रह्मार्पणमस्तु वाक्यं पानभोजनकर्मणोः ॥१०३॥
tatsaditi vadeddevi prārambhe sarvakarmaṇām | brahmārpaṇamastu vākyaṃ pānabhojanakarmaṇoḥ ||103||
— 'तत् सत्' (ऐसा) ; — कहे, हे देवि ; — प्रारम्भ में ; — समस्त कर्मों के ; — 'ब्रह्मार्पणमस्तु' (यह ब्रह्म को अर्पित हो) ; — वाक्य ; — पान और भोजन के कर्मों में

हे देवि, समस्त कर्मों के प्रारम्भ में 'तत् सत्' कहे; और पान तथा भोजन के कर्मों में 'ब्रह्मार्पणमस्तु' (यह ब्रह्म को अर्पित हो) वाक्य (कहे)।