The Great Liberation Tantra3.102
न मिथ्याभाषणं कुर्यान्न परानिष्टचिन्तनम् ।
परस्त्रीगमनञ्चैव ब्रह्ममन्त्री विवर्जयेत् ॥१०२॥
na mithyābhāṣaṇaṃ kuryānna parāniṣṭacintanam |
parastrīgamanañcaiva brahmamantrī vivarjayet ||102||
— नहीं ; — मिथ्या-भाषण ; — करे ; — न ; — दूसरों के अनिष्ट का चिन्तन ; — और पराई स्त्री-गमन ; — ब्रह्म-मन्त्री ; — त्याग करे ब्रह्म-मन्त्री मिथ्या-भाषण न करे, न दूसरों के अनिष्ट का चिन्तन करे, और पराई स्त्री-गमन का त्याग करे।