The Great Liberation Tantra· 3.101 / 153

The Great Liberation Tantra3.101

3.101
ब्रह्मश्रोता ब्रह्ममन्ता ब्रह्मान्वेषणमानसः । यतात्मा दृढबुद्धिः स्यात् साक्षाद्ब्रह्मेति भावयन् ॥१०१॥
brahmaśrotā brahmamantā brahmānveṣaṇamānasaḥ | yatātmā dṛḍhabuddhiḥ syāt sākṣādbrahmeti bhāvayan ||101||
— ब्रह्म का श्रोता ; — ब्रह्म का मन्ता ; — ब्रह्म की खोज में लीन-मन ; — यतात्मा ; — दृढ़-बुद्धि ; — हो ; — 'साक्षात् ब्रह्म' (ऐसी) ; — भावना करता हुआ

ब्रह्म का श्रोता, ब्रह्म का मन्ता, ब्रह्म की खोज में लीन-मन, यतात्मा, दृढ़-बुद्धि हो — 'यह साक्षात् ब्रह्म है' ऐसी भावना करता हुआ।