The Great Liberation Tantra· 1.2 / 72

The Great Liberation Tantra1.2

1.2
सर्वर्तुकुसुमामोदमोदिते सुमनोहरे । शैत्यसौगन्ध्यमान्द्याढ्यमरुद्भिरुपवीजिते ॥२॥
sarvartukusumāmodamodite sumanohare | śaityasaugandhyamāndyāḍhyamarudbhirupavījite ||2||
— सब ऋतुओं के पुष्पों की सुगन्ध से सुवासित ; — अत्यन्त मनोहर, मन को हरने वाला ; — शीतलता, सौगन्ध्य और मन्दता से युक्त समीरों से ; — धीरे-धीरे आन्दोलित, मन्द वायु से व्यजित

जो सब ऋतुओं के पुष्पों की सुगन्ध से सुवासित और अत्यन्त मनोहर था, तथा शीतलता, सौगन्ध्य और मन्दता से युक्त समीरों से धीरे-धीरे आन्दोलित हो रहा था,