Vijñāna Bhairava Tantra · 1.4

Vijñāna Bhairava Tantra 1.4

1.4
नादबिन्दुमयं वापि किं चन्द्रार्धनिरोधिकाः । चक्रारूढमनच्कं वा किं वा शक्तिस्वरूपकम् ॥४॥
nādabindumayaṃ vāpi kiṃ candrārdhanirodhikāḥ | cakrārūḍham anackaṃ vā kiṃ vā śaktisvarūpakam
anuṣṭubh
— नाद और बिन्दु से बना हुआ (समासगत विशेषण) ; — अथवा (अव्यय) ; — क्या? (प्रश्नवाचक) ; — अर्धचन्द्र और निरोधिका (कलाएँ) — कर्ता कारक बहुवचन ; — चक्र पर आरूढ़ (समासगत विशेषण) ; — अनच्क — स्वर-रहित, शुद्ध व्यञ्जन (कर्ता कारक) ; — अथवा (अव्यय) ; — अथवा क्या (प्रश्नवाचक) ; — शक्ति के ही स्वरूप वाला (समासगत विशेषण)

क्या वह नाद और बिन्दु से बना है? अथवा अर्धचन्द्र और निरोधिका (आदि शक्ति-स्वरूप) है? या चक्र पर आरूढ़ अनच्क (स्वर-रहित शुद्ध व्यञ्जन) है? अथवा शक्ति-स्वरूप ही है?