Vijñāna Bhairava Tantra · 1.3

Vijñāna Bhairava Tantra 1.3

1.3
किं वा नवात्मभेदेन भैरवे भैरवाकृतौ । त्रिशिरोभेदभिन्नं वा किं वा शक्तित्रयात्मकम् ॥३॥
kiṃ vā navātmabhedena bhairave bhairavākṛtau | triśirobhedabhinnaṃ vā kiṃ vā śaktitrayātmakam
anuṣṭubh
— अथवा क्या? (प्रश्नवाचक) ; — नवात्म-भेद से, नौ आत्म-तत्त्वों के विभाजन से (करण कारक — समासगत) ; — भैरव में (अधिकरण कारक) ; — भैरव-आकृति में (अधिकरण कारक) ; — त्रिशिरोभेद से विभक्त (समासगत विशेषण) ; — अथवा (अव्यय) ; — अथवा क्या (प्रश्नवाचक) ; — शक्ति-त्रय (परा, परापरा, अपरा) से युक्त, उस त्रय-स्वरूप (समासगत विशेषण)

अथवा भैरव-आकृति वाले भैरव में नवात्म-भेद (नौ आत्म-तत्त्वों) से युक्त है? या त्रिशिरोभेद से विभक्त है? अथवा शक्ति-त्रय (परा, परापरा, अपरा) स्वरूप है?