— पृष्ठ-शून्य, पीछे का शून्य (कर्म कारक — समासगत); — मूल-शून्य, नीचे का शून्य (कर्म कारक — समासगत); — एक साथ भावना करे (अव्यय + विधि लिङ्); — और (अव्यय); — जो (सम्बन्धवाचक — कर्ता); — शरीर से निरपेक्ष शक्ति के द्वारा (करण कारक — समासगत); — शून्य-मन वाला हो जाता है — कर्ता कारक
जो पृष्ठ-शून्य (पीछे का शून्य) और मूल-शून्य (नीचे का शून्य) — दोनों को एक साथ भावना करे, वह शरीर से निरपेक्ष शक्ति के द्वारा शून्य-मन वाला हो जाता है। (धारणा २१)