— अपने देह में (अधिकरण — समासगत); — सब दिशाओं में (विशेषण — समासगत); — एक साथ, युगपत् (अव्यय); — भावना करे (विधि लिङ्); — व्योम, शून्य (कर्म कारक); — निर्विकल्प-मन वाले (षष्ठी एकवचन — समासगत); — उसके लिए, उसको (षष्ठी/सम्प्रदान); — सम्पूर्ण व्योम प्रवर्तित होता है, प्रकट होता है
अपने देह में सब दिशाओं में एक साथ व्योम (शून्य) की भावना करे; उस निर्विकल्प-मन वाले के लिए सर्व-व्योम (समस्त शून्य-स्वरूप) प्रवर्तित होता है। (धारणा २०)