— उस (उठती शक्ति) के द्वारा (करण कारक); — भरकर, पूर्ण करके (क्त्वान्त); — शीघ्र, तुरन्त (अव्यय); — मूर्धा के अन्त तक, शिर के अग्र भाग तक (अव्ययीभाव); — भेदकर, तोड़कर (क्त्वान्त); — भौंहों को उठाने रूपी सेतु से (करण कारक — समासगत); — निर्विकल्प, विचार-शून्य (विशेषण); — मन को करके (क्त्वान्त); — सर्वोपरि (अधिकरण कारक — समासगत); — सर्वग (शिव) का उद्गम (कर्ता कारक — समासगत)
उस (शक्ति) से शीघ्र मूर्धा-पर्यन्त (शिर के अग्र भाग तक) पूर्ण करके, भ्रू-क्षेप-सेतु (भौंहों को उठाने रूपी सेतु) से (ब्रह्मरन्ध्र को) भेदकर, मन को निर्विकल्प करके — सर्वोपरि (परम) में सर्वग (शिव) का उद्गम होता है। (धारणा ८)