— बारह स्थानों का क्रम (कर्म कारक — समासगत); — सम्यक् रूप से, ठीक से (अव्यय); — बारह अक्षरों से भेदित, विभक्त (समासगत विशेषण); — स्थूल, सूक्ष्म और पर (परम) — इन तीन अवस्थाओं से (करण कारक — समासगत); — छोड़ते-छोड़ते (पुनरुक्त क्त्वान्त); — अन्त में (अव्यय); — शिव (कर्ता कारक — प्राप्त होते हैं)
बारह स्थानों के क्रम को सम्यक् रूप से बारह अक्षरों से भेदित करके — स्थूल, सूक्ष्म और पर अवस्था के द्वारा (प्रत्येक को) क्रमशः छोड़ते-छोड़ते अन्ततः शिव (प्राप्त होते हैं)। (धारणा ७)