— ऊपर उठती हुई (वर्तमान कृदन्त); — विद्युत्-स्वरूप वाली (समासगत विशेषण); — प्रत्येक चक्र में (अव्ययीभाव); — क्रम-क्रम से, क्रमशः (अव्यय); — ऊपर की ओर (अव्यय); — तीन मुष्टि (मुट्ठी-प्रमाण) की सीमा तक — समासगत अव्यय; — जब तक (अव्यय); — वही भैरव-उदय है (कर्ता कारक — समासगत)
विद्युत्-रूपा (शक्ति को) प्रत्येक चक्र में क्रमशः ऊपर उठती हुई, तीन मुष्टि (मुट्ठी-प्रमाण) की सीमा तक — जब तक उठती जाए — (ध्यान करे); वही भैरव का उदय है। (धारणा ६)