— मूलाधार से, जड़ से (अपादान); — किरण-सी प्रतीयमान, किरण-आभा वाली (समासगत विशेषण); — सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर स्वरूप वाली (समासगत विशेषण); — चिन्तन करे, ध्याए (विधि लिङ्); — उसका (कर्म कारक स्त्रीलिङ्ग); — द्वादशान्त (बारह अंगुल के अन्त) में (अधिकरण — समासगत); — शान्त होती हुई (वर्तमान कृदन्त स्त्रीलिङ्ग); — भैरव का उदय (कर्ता कारक — समासगत)
मूलाधार से ऊपर उठती हुई किरण-सी प्रतीयमान, सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर (शक्ति) का चिन्तन करे — द्वादशान्त (बारह अंगुल के अन्त) में जब वह शान्त हो जाती है, तब भैरव का उदय होता है। (धारणा ५)