— मोर के पंखों के द्वारा (करण कारक — समासगत); — विचित्र (अनेक-वर्ण) रूप वाले (समासगत विशेषण); — मण्डलों के द्वारा (करण कारक बहुवचन); — पञ्च-शून्य — पाँच शून्यों का समूह (कर्म कारक — समासगत); — ध्यान करने वाले का (षष्ठी एकवचन); — अनुत्तर (परम, सर्वोच्च) में — अधिकरण कारक; — शून्य में (अधिकरण कारक); — प्रवेश (कर्ता कारक); — हृदय में (अधिकरण कारक); — हो जाए (विधि लिङ्)
मोर के पंखों के विचित्र मण्डलों के समान (पञ्च-वर्णों वाले) पञ्च-शून्यों का ध्यान करते हुए (साधक का) अनुत्तर-शून्य में, हृदय में प्रवेश हो जाता है। (धारणा ९)