— इस प्रकार के क्रम से (करण कारक); — ही, मात्र (निश्चयार्थ अव्यय); — जहाँ कहीं भी (सम्बन्धवाचक अव्यय); — चिन्तना, ध्यान (कर्ता कारक); — शून्य में (अधिकरण कारक); — दीवार पर (अधिकरण कारक); — किसी पर (परम) वस्तु पर (अधिकरण कारक); — किसी पात्र (बर्तन) में (अधिकरण कारक); — स्वयं लीन हो जाता है (कर्ता कारक स्त्रीलिङ्ग — मन); — वर-प्रदा, वरदान देने वाली (विशेषण स्त्रीलिङ्ग)
इसी प्रकार के क्रम से — जहाँ कहीं भी चिन्तना हो — चाहे शून्य में, दीवार पर, किसी पर (परम पात्र) पर, या किसी पात्र पर — (मन) स्वयं लीन हो जाता है; यह (विधि) वर-प्रदा (वरदान देने वाली) है। (धारणा १०)