— कपाल के भीतर, मस्तक के मध्य में (अधिकरण कारक — समासगत); — मन को रखकर, स्थापित करके (क्त्वान्त); — स्थित रहकर, रहते हुए (वर्तमान कृदन्त); — आँखें मूँदे हुए (समासगत विशेषण); — क्रमशः, धीरे-धीरे (अव्यय); — मन की दृढ़ता से (अपादान — समासगत); — देखे, लक्ष्य करे (विधि लिङ्); — उत्तम लक्ष्य (परम तत्त्व) को — कर्म कारक
कपाल के भीतर (मस्तक के मध्य) मन को न्यस्त (स्थापित) करके, आँखें मूँदकर स्थित रहे; मन की दृढ़ता से क्रमशः उत्तम लक्ष्य (परम तत्त्व) को देखे। (धारणा ११)