— मध्य नाडी (सुषुम्ना) — कर्ता कारक; — मध्य में स्थित (समासगत विशेषण); — कमल-नाल के तन्तु के समान (सूक्ष्म) रूप वाली (समासगत विशेषण); — ध्यान की हुई, ध्यायी जाती हुई (कर्मवाच्य भूत कृदन्त); — अन्तर-व्योम (हृदय-आकाश) से युक्त (समासगत विशेषण); — देवी के द्वारा (करण कारक); — उसी से, उसके द्वारा (करण कारक); — देव (शिव) — कर्ता कारक; — प्रकाशित होता है (कर्मवाच्य वर्तमान)
मध्य नाडी (सुषुम्ना) मध्य में स्थित है — कमल-नाल के तन्तु के समान (सूक्ष्म) रूप वाली, अन्तर-व्योम (हृदय-आकाश) से युक्त — उस देवी के रूप में ध्यान करने पर उसी के द्वारा देव (शिव) प्रकाशित होते हैं। (धारणा १२)