— अनाख्यात (अकथित) यह तन्त्र (कर्ता कारक); — भोग-मोक्ष-विधायक, भोग और मोक्ष देने वाला (समासगत विशेषण); — अनाख्यात यह तन्त्र (कर्ता कारक — पुनरुक्त); — उन्हें दिया गया है (कर्म + कर्मवाच्य भूत कृदन्त); — लीलापूर्वक ही (करण + अव्यय)
यह तन्त्र अनाख्यात (किसी को न कहा गया) है, और भोग तथा मोक्ष — दोनों का विधायक है; यह अनाख्यात तन्त्र (उन योग्य पात्रों को) लीलापूर्वक प्रदत्त किया गया है।