Vijñāna Bhairava Tantra · 1.152

Vijñāna Bhairava Tantra 1.152

1.152
इदं विज्ञानमुदितं जरामरणनाशनम् । ब्रह्मादिदेववन्द्यस्य मन्थानभैरवस्य च ॥१५२॥
idaṃ vijñānam uditaṃ jarāmaraṇanāśanam | brahmādidevavandyasya manthānabhairavasya ca
anuṣṭubh
— यह विज्ञान (कर्ता कारक) ; — उदित हुआ है (कर्मवाच्य भूत कृदन्त) ; — जरा-मरण-नाशक (समासगत विशेषण) ; — ब्रह्मा आदि देवों से वन्द्य (षष्ठी — समासगत) ; — मन्थान-भैरव के (षष्ठी — समासगत) ; — और (अव्यय)

ब्रह्मा आदि देवों से वन्द्य मन्थान-भैरव के (मुख से) यह विज्ञान उदित हुआ है — जो जरा-मरण का नाशक है।