Vijñāna Bhairava Tantra · 1.150

Vijñāna Bhairava Tantra 1.150

1.150
श्रीदेव्युवाच । देवदेव महादेव परिपूर्णोऽसि मे प्रभो । शङ्करस्य त्वमेवात्मा शक्तिर्जगति शाश्वती ॥१५०॥
śrīdevy uvāca | devadeva mahādeva paripūrṇo'si me prabho | śaṅkarasya tvam evātmā śaktir jagati śāśvatī
anuṣṭubh
— श्रीदेवी ने कहा (परोक्ष भूत) ; — हे देवों के देव! हे महादेव! (सम्बोधन) ; — हे प्रभो! मेरे लिए परिपूर्ण हैं — सम्बोधन + विशेषण + क्रिया + सम्प्रदान ; — आप ही शङ्कर के आत्मा हैं — षष्ठी + कर्ता + कर्ता ; — जगत् में शाश्वती शक्ति (कर्ता + अधिकरण + विशेषण)

श्रीदेवी ने कहा — हे देवों के देव, महादेव! हे प्रभो! आप मेरे लिए परिपूर्ण हैं; आप ही शङ्कर के आत्मा हैं और जगत् में शाश्वती शक्ति हैं।