— शक्ति की अवस्था में प्रविष्ट (साधक) का (षष्ठी एकवचन — समासगत); — निर्विभाग (अखण्ड) रूप से (करण कारक); — भावना, अनुभूति (कर्ता कारक); — तब (अव्यय); — वह, असौ (कर्ता कारक); — शिव-रूप हो जाता है (विधि लिङ्); — शाक्त — शक्ति-मार्ग (कर्ता कारक स्त्रीलिङ्ग); — मुख, द्वार (कर्ता कारक); — यहाँ, इस तन्त्र में (अव्यय); — कहा जाता है (कर्मवाच्य वर्तमान)
शक्ति की अवस्था में प्रविष्ट (साधक) की निर्विभाग (अखण्ड) भावना से उस समय वह शिव-स्वरूप हो जाता है; यहाँ इसी को शाक्त मुख (शिव में प्रवेश का द्वार) कहा गया है।