— नहीं (निषेधार्थ); — अग्नि की (अपादान/षष्ठी एकवचन); — दाहक शक्ति (कर्ता कारक); — पृथक्, अलग (विशेषण); — कल्पित होती है, मानी जाती है (कर्मवाच्य वर्तमान); — केवल, मात्र (अव्यय); — ज्ञान-सत्ता में (अधिकरण — समासगत); — यह प्रारम्भ है (कर्ता कारक); — प्रवेश के विषय में, प्रवेश-द्वार के रूप में (अधिकरण कारक)
अग्नि की दाहक शक्ति को अग्नि से पृथक् नहीं माना जाता; (इसी प्रकार शक्ति शिव से अभिन्न है)। केवल ज्ञान-सत्ता में प्रवेश के लिए यह (शक्ति-शिव का भेद-कथन) एक प्रारम्भिक उपाय है।