— शक्ति और शक्तिमान् (शक्ति-धारी) का (षष्ठी द्विवचन — समासगत); — जिस प्रकार, जैसा (सम्बन्धवाचक अव्यय); — अभेद, अभिन्नता (कर्ता कारक); — सदैव (अव्यय); — स्थित है (कर्मवाच्य भूत कृदन्त); — इसलिए (अव्यय); — उसके धर्मों को धारण करने के कारण (अपादान/हेतु — समासगत); — परा शक्ति (कर्ता कारक); — परम आत्मा की (षष्ठी एकवचन)
जैसे शक्ति और शक्तिमान् (शक्तिधारी) में सर्वदा अभेद ही स्थित रहता है, उसी प्रकार धर्म-धर्मित्व के कारण परम-आत्मा की परा शक्ति (उससे अभिन्न) है।