Vijñāna Bhairava Tantra · 1.12

Vijñāna Bhairava Tantra 1.12

1.12
एवंविधा भैरवस्य यावस्था परिगीयते । सा परा पररूपेण परा देवी प्रकीर्तिता ॥१२॥
evaṃvidhā bhairavasya yāvasthā parigīyate | sā parā pararūpeṇa parā devī prakīrtitā
anuṣṭubh
— इस प्रकार की (विशेषण स्त्रीलिङ्ग) ; — भैरव की (षष्ठी एकवचन) ; — जो अवस्था (सम्बन्धवाचक) ; — गायी जाती है, प्रशंसित होती है (कर्मवाच्य वर्तमान) ; — वह परा है (कर्ता कारक स्त्रीलिङ्ग) ; — पर-स्वरूप के द्वारा, सर्वोच्च रूप से (करण कारक — समासगत) ; — परा देवी (कर्ता कारक) ; — प्रकीर्तित है, घोषित की गई है (कर्मवाच्य भूत कृदन्त)

भैरव की जो इस प्रकार की अवस्था गायी जाती है, वह परा है — परम स्वरूप के रूप में वही परा देवी कही गयी है।