— मन्त्रों के अर्थ-रूप कहे गए स्वरूप (कर्म कारक बहुवचन — समासगत); — अधिकारी (साधक) की विशेषता के अनुसार (अपादान — समासगत); — (सफलतापूर्वक) सिद्ध करता हुआ साधक (हो जाता है) — कर्ता कारक; — उन (रूपों को) — कर्म कारक बहुवचन; — सिद्ध करता है — क्रिया, प्रेरणार्थक वर्तमान; — कोई (विरल साधक) — कर्ता कारक; — सिद्ध करता हुआ — वर्तमान कृदन्त; — हो जाता है — विधिलिङ्, √भू
मन्त्रों के अर्थ के रूप में जो (विशिष्ट) रूप कहे गए हैं, वे अधिकारी (साधक) की विशेषता के अनुसार (होते हैं); कोई उन्हें सिद्ध करता है — सिद्ध करता हुआ साधक हो जाता है।