कररुद्धदृगस्त्रेण भ्रूभेदाद्द्वाररोधनात् ।
दृष्टे बिन्दौ क्रमाल्लीने तन्मध्ये परमा स्थितिः ॥१०१॥
kararuddhadṛgastreṇa bhrūbhedād dvārarodhanāt |
dṛṣṭe bindau kramāl līne tanmadhye paramā sthitiḥ
anuṣṭubh
हाथों से दृष्टि को रोकने से, द्वारों के रोधन से (बिन्दु के दिखाई देने और लीन होने पर) उसके मध्य में परम स्थिति है।