Vijñāna Bhairava Tantra · 1.101

Vijñāna Bhairava Tantra 1.101

1.101
कररुद्धदृगस्त्रेण भ्रूभेदाद्द्वाररोधनात् । दृष्टे बिन्दौ क्रमाल्लीने तन्मध्ये परमा स्थितिः ॥१०१॥
kararuddhadṛgastreṇa bhrūbhedād dvārarodhanāt | dṛṣṭe bindau kramāl līne tanmadhye paramā sthitiḥ
anuṣṭubh
— हाथों से दृष्टि का अवरोध (कर्ता कारक — समासगत) ; — द्वारों के रोधन से (अपादान — समासगत) ; — परम स्थिति (कर्ता कारक)

हाथों से दृष्टि को रोकने से, द्वारों के रोधन से (बिन्दु के दिखाई देने और लीन होने पर) उसके मध्य में परम स्थिति है।