Vijñāna Bhairava Tantra · 1.100

Vijñāna Bhairava Tantra 1.100

1.100
मध्यनाडी मध्यसंस्था बिससूत्राभरूपया । ध्यातान्तर्व्योमया देव्या तया देवः प्रकाशते ॥१००॥
madhyanāḍī madhyasaṃsthā bisasūtrābharūpayā | dhyātāntarvyomayā devyā tayā devaḥ prakāśate
anuṣṭubh
— मध्य-नाडी, सुषुम्ना (कर्ता कारक) ; — कमल-नाल-तन्तु-सदृश रूप वाली (समासगत विशेषण) ; — अन्तर-व्योम (हृदय-आकाश)-स्वरूपा देवी के द्वारा (करण कारक — समासगत)

मध्य-नाडी (सुषुम्ना) — कमल-नाल-तन्तु-सदृश रूप वाली, अन्तर-व्योम-स्वरूपा देवी के रूप में ध्यान करने पर उसी से देव (शिव) प्रकाशित होते हैं।