The Essence of the Tantra· 9.27 / 53

The Essence of the Tantra9.27

9.27

अत्र च परस्परं भेदकलनया अवान्तरभेदज्ञानकुतूहली तन्त्रालोकम् एव अवधारयेत्

Transliteration (IAST)

atra ca parasparaṃ bhedakalanayā avāntarabhedajñānakutūhalī tantrālokam eva avadhārayet

— परस्पर भेद-कलना से (पारस्परिक भेदों की गणना से) ; — अवान्तर (मध्यवर्ती) भेद-ज्ञान का कुतूहली ; — तन्त्रालोक का ही ; — अवधारण (अध्ययन/निश्चय) करे

और यहाँ परस्पर भेद-कलना से अवान्तर (मध्यवर्ती) भेद-ज्ञान का कुतूहली तन्त्रालोक का ही अवधारण (अध्ययन) करे।