The Essence of the Tantra· 9.10 / 53

The Essence of the Tantra9.10

9.10

सैव इच्छाशक्तिरूपतां स्वातन्त्र्यस्वभावां जिघृक्षन्ती मन्त्रमहेश्वरस्य

Transliteration (IAST)

saiva icchāśaktirūpatāṃ svātantryasvabhāvāṃ jighṛkṣantī mantramaheśvarasya

— वही (शुद्धविद्या) ; — इच्छा-शक्ति-रूपता को ; — स्वातन्त्र्य-स्वभाव वाली ; — ग्रहण करने की इच्छुक ; — मन्त्रमहेश्वर की

मन्त्रमहेश्वर की वही (शुद्धविद्या) स्वातन्त्र्य-स्वभाव वाली इच्छा-शक्ति-रूपता को ग्रहण करने की इच्छुक (होती है)।