The Essence of the Tantra· 8.81 / 93

The Essence of the Tantra8.81

8.81

अन्ये तु सात्त्विकात् मनो राजसाच् च इन्द्रियाणि इति

Transliteration (IAST)

anye tu sāttvikāt mano rājasāc ca indriyāṇi iti

— सात्त्विक (अहङ्कार) से ; — मन ; — राजस (अहङ्कार) से ; — इन्द्रियाँ (ज्ञान- एवं कर्म-इन्द्रिय)

किन्तु अन्य (कहते हैं) कि सात्त्विक से मन तथा राजस से इन्द्रियाँ (उत्पन्न होती हैं)।