The Essence of the Tantra· 8.77 / 93

The Essence of the Tantra8.77

8.77

स च पञ्चकः अनुसन्धेस् तावत्त्वात्

Transliteration (IAST)

sa ca pañcakaḥ anusandhes tāvattvāt

— पञ्चक — पाँच का समूह ; — अनुसन्धि (प्रयोजन/अभिप्राय) के ; — उतने ही (पाँच) होने के कारण

और वह पञ्चक (पाँच का समूह) है, क्योंकि अनुसन्धि (प्रयोजन के प्रकार) उतने ही हैं।