The Essence of the Tantra· 8.64 / 93

The Essence of the Tantra8.64

8.64

एवं क्षुब्धात् प्रधानात् कर्तव्यान्तरोदयः न अक्षुब्धाद् इति

Transliteration (IAST)

evaṃ kṣubdhāt pradhānāt kartavyāntarodayaḥ na akṣubdhād iti

— क्षुब्ध प्रधान (प्रकृति) से ; — अन्य कर्तव्य (कार्य) का उदय ; — अक्षुब्ध (शान्त) से

इस प्रकार क्षुब्ध प्रधान से अन्य कर्तव्य (कार्य) का उदय होता है, अक्षुब्ध से नहीं।