The Essence of the Tantra· 6.70 / 82

The Essence of the Tantra6.70

6.70

उदाने तु द्वादशान्तावधिश् चारः स्पन्दमात्रात्मनः कालस्य

Transliteration (IAST)

udāne tu dvādaśāntāvadhiś cāraḥ spandamātrātmanaḥ kālasya

— उदान में (ऊर्ध्वगामी वायु में) ; — द्वादशान्त-पर्यन्त सीमित ; — चार — गति, संचरण ; — स्पन्द-मात्र-रूप (काल) का ; — काल का

किन्तु उदान में स्पन्द-मात्र-रूप काल का चार द्वादशान्त-पर्यन्त (सीमित) होता है।