The Essence of the Tantra· 6.57 / 82

The Essence of the Tantra6.57

6.57

एवं यथा प्राणे कालोदयः तथा अपाने ऽपि हृदयात् मूलपीठपर्यन्तम्

Transliteration (IAST)

evaṃ yathā prāṇe kālodayaḥ tathā apāne 'pi hṛdayāt mūlapīṭhaparyantam

— प्राण में (बहिर्गामी श्वास में) ; — काल-उदय ; — अपान में (अन्तर्गामी श्वास में) ; — हृदय से ; — मूल-पीठ-पर्यन्त (मूलाधार तक)

इस प्रकार जैसे प्राण में काल-उदय (होता है), वैसे ही अपान में भी — हृदय से लेकर मूल-पीठ-पर्यन्त।