The Essence of the Tantra· 6.56 / 82

The Essence of the Tantra6.56

6.56

तत एव स्वप्नसङ्कल्पादौ वैचित्र्यम् अस्य न विरोधावहम्

Transliteration (IAST)

tata eva svapnasaṅkalpādau vaicitryam asya na virodhāvaham

— स्वप्न, संकल्प आदि में ; — विचित्रता (काल-अनुभव की विविधता) ; — विरोध लाने वाली

इसी कारण स्वप्न, संकल्प आदि में इसकी विचित्रता विरोध नहीं लाती।