The Essence of the Tantra· 5.6 / 43

The Essence of the Tantra5.6

5.6

ततो वासनाशेषान् अपि भावान् तेन चक्रेण इत्थं कृतान् ध्यायेत्

Transliteration (IAST)

tato vāsanāśeṣān api bhāvān tena cakreṇa itthaṃ kṛtān dhyāyet

— केवल वासना-शेष रह गये ; — भाव — सत्ताएँ ; — उस (शक्ति-)चक्र के द्वारा ; — इस प्रकार (अनुत्तर में लीन) किये गये ; — ध्यान करे

तदनन्तर जो भाव केवल वासना-शेष रह गये हैं, उन्हें भी उस चक्र के द्वारा इस प्रकार (अनुत्तर में लीन) किया गया — ऐसा ध्यान करे।