The Essence of the Tantra· 4.8 / 46

The Essence of the Tantra4.8

4.8

तस्मात् शाम्भवदृड्ःअशक्तिपाताविद्धा एव सदागमादिक्रमेण विकल्पं संस्कृत्य परं स्वरूपं प्रविशन्ति

Transliteration (IAST)

tasmāt śāmbhavadṛḍḥaśaktipātāviddhā eva sadāgamādikrameṇa vikalpaṃ saṃskṛtya paraṃ svarūpaṃ praviśanti

— शाम्भव दृढ़ शक्तिपात से विद्ध (बिंधे हुए) ; — सदागम आदि के क्रम से ; — विकल्प को संस्कृत कर के ; — परम स्वरूप में ; — प्रवेश करते हैं

अतः शाम्भव दृढ़ शक्तिपात से विद्ध हुए (साधक) ही सदागम आदि के क्रम से विकल्प को संस्कृत कर परम स्वरूप में प्रवेश करते हैं।