The Essence of the Tantra· 4.15 / 46

The Essence of the Tantra4.15

4.15

अभ्यासश् च परे तत्त्वे शिवात्मनि स्वस्वभावे न सम्भवत्य् एव

Transliteration (IAST)

abhyāsaś ca pare tattve śivātmani svasvabhāve na sambhavaty eva

— अभ्यास — पुनरावृत्त साधना ; — परम तत्त्व में ; — शिवात्मक — जिसका आत्मा शिव है ; — स्व-स्वभाव-रूप — अपना ही निज स्वभाव ; — सम्भव नहीं है

और शिवात्मक, अपने ही स्वभाव-रूप परम तत्त्व में अभ्यास सम्भव ही नहीं है।