The Essence of the Tantra· 4.1 / 46

The Essence of the Tantra4.1

4.1

तत्र यदा विकल्पं क्रमेण संस्कुरुते समनन्तरोक्तस्वरूपप्रवेशाय तदा भावनाक्रमस्य सत्तर्कसदागमसद्गुरूपदेशपूर्वकस्य अस्ति उपयोगः

Transliteration (IAST)

tatra yadā vikalpaṃ krameṇa saṃskurute samanantaroktasvarūpapraveśāya tadā bhāvanākramasya sattarkasadāgamasadgurūpadeśapūrvakasya asti upayogaḥ

— विकल्प — मानसिक निश्चय/संकल्प ; — क्रमशः संस्कृत करता है — परिमार्जित करता है ; — अभी-अभी कहे गये स्वरूप में प्रवेश के लिए ; — भावना-क्रम का — साक्षात्कारी ध्यान-क्रम का ; — सत्तर्क, सदागम एवं सद्गुरु-उपदेशपूर्वक ; — उपयोग, प्रयोजन, सार्थकता

यहाँ जब (साधक) अभी-अभी कहे गये स्वरूप में प्रवेश के लिए विकल्प को क्रमशः संस्कृत करता है, तब सत्तर्क, सदागम एवं सद्गुरु के उपदेशपूर्वक भावना-क्रम का उपयोग है।