The Essence of the Tantra· 3.34 / 34

The Essence of the Tantra3.34

3.34

अत्रापि पूर्ववत् न मन्त्रादियन्त्रणा काचिद् इति

Transliteration (IAST)

atrāpi pūrvavat na mantrādiyantraṇā kācid iti

— यहाँ भी (इस मार्ग में) ; — पूर्ववत् — पहले की भाँति ; — मन्त्र आदि की नियन्त्रणा ; — कोई (भी)

यहाँ भी पूर्ववत् मन्त्र आदि की कोई नियन्त्रणा नहीं है।