The Essence of the Tantra· 22.8 / 53

The Essence of the Tantra22.8

22.8

तत्र बाह्यं स्थण्डिलम् आनन्दपूर्णं वीरपात्रम् अरुणः पटः पूर्वोक्तम् अपि वा लिङ्गादि

Transliteration (IAST)

tatra bāhyaṃ sthaṇḍilam ānandapūrṇaṃ vīrapātram aruṇaḥ paṭaḥ pūrvoktam api vā liṅgādi

— बाह्य (याग में) स्थण्डिल ; — आनन्द (मद्य) से परिपूर्ण ; — वीर-पात्र ; — अरुण (लाल) पट ; — पूर्वोक्त लिङ्ग आदि

वहाँ बाह्य (याग में) स्थण्डिल आनन्द (मद्य) से परिपूर्ण है, वीर-पात्र (वीरों का पात्र), अरुण (लाल) पट, अथवा पूर्वोक्त लिङ्ग आदि (आधार होते हैं)।